शिमला: हिमाचल प्रदेश में सरकारी खजाने से मंत्रियों और विधायकों के आयकर भुगतान का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मोहम्मद रफीक व न्यायमूर्ति ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने हिमाचल सरकार को नोटिस जारी किया है। यशपाल राणा की तरफ से दाखिल याचिका में हाईकोर्ट से गुहार लगाई गई है कि विधायकों व मंत्रियों के वेतन पर राज्य सरकार का टैक्स भरना असंवैधानिक है। इस याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने यह नोटिस जारी किया है।
दरअसल याचिका में कहा गया है कि विधायक व मंत्रियों को अपने वेतन पर इनकम टैक्स भरने से छूट मिली हुई है। यह छूट हिमाचल विधानसभा के भत्ते और पेंशन एक्ट 1971 के तहत है। हिमाचल प्रदेश में विधायक और मंत्री अपने वेतन पर टैक्स नहीं भरते हैं। यह टैक्स उनकी तरफ से राज्य सरकार भरती है। याचिका में हाईकोर्ट से गुहार लगाई गई है कि इस प्रक्रिया को असंवैधानिक करार देते हुए निरस्त किया जाए।
5 प्रदेशों में विधायक खुद नहीं भरते आयकर
देश में ऐसे 5 राज्य हैं, जहां मंत्री और विधायकों का इनकम टैक्स सरकार द्वारा भरा जाता है। इनमें हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और मध्य प्रदेश शामिल है, जबकि अन्य सभी राज्य में विधायक खुद आयकर भरते हैं। लिहाजा याचिकाकर्ता ने अदालत से आग्रह किया है कि प्रदेश में भी माननीय अपना आयकर खुद भरें। याचिकाकर्ता ने भाजपा नेता महेंद्र ठाकुर, नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री, माकपा विधायक राकेश सिंघा के अलावा निर्दलीय विधायक होशियार सिंह को भी पार्टी बनाया गया है।
याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार को इनकम टैक्स भरने से रोका जाए। याचिका पर डिवीजन बैंच में सोमवार को सुनवाई हुई थी। वहीं, इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता रजनीश मानिकताला ने बताया कि वर्ष 2018-19 में सरकार ने 1.79 करोड़ रुपए का इनकम टैक्स भरा। इसी तरह वर्ष 2019-20 में सरकार ने विधायकों और मंत्रियों आदि का इनकम टैक्स भरा। यह रकम 1.78 करोड़ रुपए से अधिक थी।







