शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) शिमला ओसीटी मशीन खरीदेगा। इस मशीन का इस्तेमाल दिल की मुख्य नस के बंद होने का पता लगाने के लिए किया जाता है। मशीन के आने के बाद दिल के रोगियों को बड़ी राहत मिलने वाली है।
अभी पीजीआई चंडीगढ़ से मंगवानी पड़ती है मशीन
आईजीएमसी प्रबंधन अभी ओसीटी मशीन (ऑप्टीकल कोरिहेन्स टोमोग्राफी) पीजीआई चंडीगढ़ से मंगवाता है ताकि मरीजों का ऑपरेशन किया जा सके। लेकिन अब आईजीएमसी प्रबंधन ने इस मशीन को खरीदने का फैसला लिया है। आईजीएमसी के प्राचार्य डॉ. सुरेंद्र सिंह ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि जल्द ही मशीन की खरीद संबंधी प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। उन्होंने बताया कि दिल के मरीजों की मुख्य नस बंद होने पर इस मशीन के जरिये अंदर तक हृदय में आने वाली रुकावटों का पता लगाया जा सकता है। आईजीएमसी प्रबंधन को यह मशीन अभी तक पीजीआई से मंगवानी पड़ती है। इस कारण मरीजों के ऑपरेशन के लिए इंतजार करना पड़ता है। इस कारण मरीजों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही थी। मशीन की कीमत डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक है।
असुविधा के चलते एक मरीज की हो गई थी मौत
सरकाघाट (मंडी) के 47 साल के एक मरीज की दिल के ऑपरेशन के दौरान बीते सप्ताह मौत भी हो गई थी। इस पर परिजनों ने खूब हंगामा किया था। इस मरीज की भी मुख्य नस बंद थी। इस मामले पर प्रबंधन को एमएस की अध्यक्षता में जांच कमेटी तक बैठानी पड़ी है। अब यह समस्या बार-बार पैदा न हो इसलिए अस्पताल प्रबंधन ने मशीन खरीदने का फैसला लिया है।
सौ अधिक ऑपरेशन कर चुका है कार्डियोलॉजी विभाग
आईजीएमसी का कार्डियोलॉजी विभाग मुख्य नस बंद होने के अब तक सौ से अधिक ऑपरेशन कर चुका है। इसके लिए अस्पताल में डॉक्टरों की आठ सदस्यीय टीम है। ऑपरेशन के लिए ओसीटी मशीन बाहर से ही मंगवानी पड़ती है। अब नई मशीन आने के बाद ऐसे मरीजों के तुरंत ऑपरेशन किए जा सकेंगे।


