ब्यूरो: मनुष्य ने जब धरती पर जन्म लिया तो उस समय वो एक दूसरे से ईशारों में बात किया करते थे. लेकिन भाषा की उत्पत्ति से आशय उस काल से है जब मानव ने बोलना आरम्भ किया और ‘भाषा’ सीखना आरम्भ किया. प्रचीन काल से अब तक हिंदी भाषा का वर्चस्व तेजी से बड़ गया है. हिंदी भाषा दुनिया में सबसे ज्यादा बोले जानी वाली भाषाओं में तीसरे स्थान पर है. भारत में 70 फीसदी से भी ज्यादा लोग हिंदी बोलते हैं.
इसीलिए 14 सिंतम्बर को हर साल हिंदी दिवस के रुप में बनाया जाता है. इस दिन को मनाने के पीछे की भी खास वजह है. हिंदी दिसव को मनाने का मकसद हिंदी की महत्वता को बढ़ाना और लोगों को इसका महत्व समझाना है. बता दें, हिंदी दिवस एक बार नहीं बल्कि साल में दो बार मनाया जाता है. साल 1949 में आज ही के दिन देवनागरी लिपि में हिंदी को भारत की आधिकारिक भाषा घोषित किया गया था. इसके बाद हिंदी का महत्व बढ़ाने और इसे हर क्षेत्र में प्रसारित करने के लिए 1953 से हर साल देशभर में 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाने लगा. इसके अलावा 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस सेलिब्रेट किया जाता है.
संविधान की धारा 343(1) के अनुसार हिंदी और लिपि देवनागरी भारतीय संघ की राजभाषा है. संविधान सभा की एक लंबी चर्चा के बाद 14 सितंबर को 1949 को हिंदी को भारत की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया गया था. तब से 14 सितंबर को हिंदी दिवस और 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है.







