
ब्यूरो : शराब और शिक्षा मामले के बाद अब दिल्ली की केजरीवाल सरकार पर बिजली सब्सिडी को लेकर अनियमितता बरतने का आरोप लग रहा है. ताज़ा मामले में उपराज्यपाल ने विनय कुमार सक्सेना ने मुख्य सचिव को उन आरोपों की जांच करने को कहा है, जिनके मुताबिक बिजली वितरण कंपनियों को सब्सिडी राशि भगुतान में अनियमितता बरती गई है. एलजी ने 7 दिनों के भीतर चीफ सेक्रेटरी से इस बाबत रिपोर्ट मांगी है.
बता दें कि इससे पहले शराब और शिक्षा के मामले में भी उप राज्यपाल जांच के आदेश दे चुके हैं. आरोप है कि आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता और डायलॉग एंड डेवलपमेंट कमीशन के उपाध्यक्ष जैस्मिन शाह और आप सांसद एनडी गुप्ता के बेटे नवीन गुप्ता, इन दोनों को बीआरपीएल और बीवाईपीएल में डायरेक्टर बनाया गया जिन्होंने घोटाले को अंजाम दिया. यह दोनों डिस्कॉम कंपनियां अनिल अंबानी ग्रुप की हैं, जिसमें दिल्ली सरकार 49% की हिस्सेदार है.
आरोप है कि दिल्ली सरकार को 21,250 करोड रुपए डिफ़ॉल्ट वेंडर DISCOM (BRPL,BYPL) से वसूलने थे (पावर परचेस के लिए की गयी लेट पेमेंट के नाम पर) लेकिन सरकार ने एक डील के तहत 11,550 करोड़ रुपये का सेटलमेंट कर दिया (क्योंकि एक तरफ दिल्ली सरकार ने डिस्कॉम से पैसा लेना था तो वहीं सब्सिडी का पैसा डिस्कॉम को देना भी था). वहीं कहा गया है कि तीसरी कंपनी टाटा पावर है जिस पर कोई बकाया नहीं था यानी इसको क्लीन चिट दी है. DISCOM उपभोक्ता से देरी से पेमेंट होने पर 18 फ़ीसदी सरचार्ज वसूलती रही और सरकार को 12% देती रही जिससे बिजली वितरण कंपनियों को 8500 करोड़ रुपए विंडफॉल गेन हुआ जो कि सरकारी खजाने की कीमत पर हुआ.
आरोप है कि सरकार ने 2015-16 के अपने ही कैबिनेट फैसले का उल्लंघन किया जिसमें बीआरपीएल और बीवाईपीएल का हर साल ऑडिट करने की बात कही गई थी. आरोप ये भी है कि 11,500 करोड़ रुपये के सेटलमेंट का भी ऑडिट नहीं हुआ. उपभोक्ताओं को पावर सब्सिडी देने के मामले में DBT योजना रोकी गई ताकि लाभार्थियों की असल संख्या को छुपाया जा सके और DISCOMS को पैसा देकर उनसे कमीशन लिया जा सके. शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि पहले बिजली वितरण कंपनियों में दिल्ली सरकार के वरिष्ठ अधिकारी डायरेक्टर हुआ करते थे लेकिन आम आदमी पार्टी की सरकार में पॉलिटिकल लोगों को डायरेक्टर बनाया गया.
दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार द्वारा दिल्लीवासियों को 200 यूनिट तक फ्री बिजली दी जा रही है. उपभोक्ताओं को वर्तमान में 200 यूनिट तक कोई बिल नहीं भरना होता है, जबकि प्रति माह 201 से 400 यूनिट बिजली की खपत पर 800 रुपये की सब्सिडी मिलती है. 1 अक्टूबर 2022 से इस सब्सिडी योजना में सरकार ने बदलाव किया है. नए आदेश के मुताबिक अब सब्सिडी सिर्फ उन्हीं लोगों को दी जाएगी, जो इसकी मांग करेंगे. यानी अब दिल्ली में सस्ती बिजली वैकल्पिक हो गई है. यानी अगर कोई बिजली उपभोक्ता बिजली सब्सिडी चाहता है तो उसको अभी की तरह सब्सिडी वाली मुफ्त या रियायती दर वाली बिजली मिलेगी.







