शिमला : पूर्व मंत्री सुरेश भारद्वाज ने प्रदेश सरकार पर शिमला नगर निगम के वार्ड बढ़ाने के फैसले को राजनीतिक लाभ के लिए बदलने का आरोप लगाया है। भारद्वाज ने कहा कि उनकी सरकार में तर्कसंगत रूप से पुनर्सीमांकन कर वार्डों की संख्या बढ़ाई थी और विधानसभा में इस पर चर्चा कर कानून पास किया गया था जबकि कांग्रेस सरकार ने अध्यादेश लाकर चर्चा से बचने का काम किया है।
शिमला से ज़ारी एक बयान में उन्होंने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार ने जनसंख्या को आधार मान कर जहाँ ज़रूरत थी परिसीमन के बाद वार्डों की संख्या को बढ़ाया था जिस से बेहतर काम हो सके।
उन्होंने कहा कि इसके लिए विधानसभा में कानून पास किया गया था जिस पर व्यापक चर्चा हुई और अभी कि सरकार में महत्वपूर्व पदों पर आसीन लोगों ने उस चर्चा में भाग भी लिया था। लेकिन राजनीतिक हित साधने के लिए सरकार चर्चा से भाग कर अध्यादेश लेकर फैसला पलट रही है जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है।
भारद्वाज ने कहा कि कांग्रेस को याद करना चाहिए कि 2017 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने कसुम्पटी विधानसभा क्षेत्र में अधीन पड़ने वाले 6 वार्डों कि संख्या 12 और शिमला ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में अधीन पढ़ने वाले 2 वार्डों को बढ़ा आकर चार कर दिया था लेकिन शिमला शहरी जहाँ से वो विधायक थे, उस क्षेत्र में अधीन पढ़ने वाले वार्डों कि संख्या में कोई इज़ाफ़ा नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि शिमला शहरी के अधीन 2011 कि जनसंख्या के हिसाब से बहुत बड़े बड़े वार्ड हैं जिनका परिसीमन कर संख्या बढ़ाना अनिवार्य था। लेकिन कांग्रेस के कुछ लोगों के हितों कि रक्षा करने के लिए सरकार ने शिमला कि जनता के हित कि अनदेखी की है।
सुरेश भारद्वाज ने सरकार से कहा कि यदि सरकार वार्डों कि संख्या बढ़ाना नहीं चाहती तो भी वार्डों का पुनर्सीमनाकन ज़रूरी है जिस से आम जनता को बेहतर और सामान रूप से सुविधाएं मिल सके। भारद्वाज ने कहा कि पिछली सरकार में जनसंख्या और भौगौलिक परिस्थितियों को ध्यान में रख कर अधिकारियों ने परिसीमन किया था। जनसंख्या को आधार मान कर परिसीमन करना कानून कि बाध्यता भी है।







