पूनम मेहता/शिमला: आज देश के कईं राज्यों में यह कोरोना वैक्सीन को लगाने की प्रक्रिया का ड्राई रन किया गया। ड्राई रन की खबरें सुर्खियों में बनी रही। लाजमी हैं बहुत से सवाल हर किसी के मन में आ रहें होंगें। क्यूंकि एक लंबे और कष्टदायक समय के बाद कुछ राहत भरा सुनने को मिल रहा है। जो प्रश्न आपके मन में उठे होंगें उन्हें समझ कर उनके उत्तर देने का प्रयास खबर नाउ की टीम ने किया।
क्यों करवाया जा रहा ड्राई रन है?
इस ड्राई रन के माध्यम से प्लानिंग और वैक्सीन देने की प्रक्रिया के बीच सामंजस्य बैठाने की कोशिश की जाएगी. साथ ही पहले वेक्सिनेशन की एक प्रोसेस को पूरा कर लिया जाएगा। इतना ही वैक्सीन और मेडिकल फील्ड से जुड़े लोगों का कॉन्फिडेंस भी बढ़ेगा, जिसका फायदा आगे मिलेगा।
क्या लोगों को दी जाएगी वैक्सीन?
आप लोग सोच रहे होंगे कि इसमें लोगों को वैक्सीन भी दी जाएगी। मगर, ऐसा नहीं है, इस दौरान किसी को भी वैक्सीन नहीं दी जाएगी, बस ये देखा जाएगा कि वैक्सिनेशन के दौरान किस प्रक्रिया से गुजरना होगा और उस दौरान क्या क्या किया जाएगा। उस प्रोसेस का अभी सिर्फ मॉक टेस्ट होगा।
ड्राई रन में कैसे होगा काम?
दरअसल, इस ड्राई रन में करीब 25 लोगों पर टेस्ट किया जाएगा। यानी पहले 25 लोगों को चुना जाएगा और उन्हें कोविन डाउनलोड करने के लिए कहा जाएगा। उसके आधार पर ही आगे की प्रक्रिया की जाएगी। इस ड्राई रन में वैक्सीन कार्यक्रम के दौरान होने वाले सभी प्रोसेस को फॉलो करवाया जाएगा और इस बीच आने वाली दिक्कतों पर नज़र रखी जाएगी। साथ ही आगे इस पर काम किया जाएगा।
ट्रायल रन और ड्राई रन में क्या है अंतर?
बता दें कि वैक्सीन ट्रायल रन और ड्राई रन काफी अलग अलग है। हाल ही में जयपुर के महाराजा अग्रसेन हॉस्पिटल में भी भारत बायोटिक्स का तीसरे फेज का ट्रायल किया गया था, जिसमें कई लोगों ने हिस्सा लिया था। हॉस्पिटल के सीनियर डॉक्टर विकल्प वशिष्ठ ने बताया कि ट्रायल रन में एक निश्चित मात्रा में वैक्सीन दी जाती है और इसमें लोगों को 28 दिन तक वैक्सीन लगवाने वाले वॉलेन्टियर को निगरानी में रखा जाता है और 28 दिन बाद एक डोज और दी जाती है। जबकि ड्राई रन में मेडिकल स्टाफ की मॉक ड्रिल होगी। ट्रायल रन में कुछ लोगों को वैक्सीन दी जाती है, जो पिछले दिनों में महाराजा अग्रसेन हॉस्पिटल में दी गई थी।
चुनाव प्रक्रिया की तरह है वैक्सीन लगाने की प्रक्रिया
वैक्सीनेशन की प्रक्रिया पूरी तरह चुनाव प्रकिया की तरह है, जिसमें लिस्ट में रजिस्टर्ड नाम वाले व्यक्ति को ही एंट्री मिलेगी। इस दौरान वैक्सीन करने वाले व्यक्ति को अपना परिचय पत्र देना होगा। चाहे पैन कार्ड हो या आधार कार्ड. साफ है कि 10 महीने से कोरोना की मुश्किल से जूझ रहे भारत में वैक्सीन आने से लोगों ने राहत की सांस ली है। वहीं वैक्सीनेशन का सफल ट्रायल कहीं ना कहीं बड़े अभियान की तैयारी है।
क्या है तैयारी?
इस उद्देश्य के लिए करीब 96,000 टीका लगाने वालों को प्रशिक्षित किया गया है। राज्य किसी भी वैक्सीन/सॉफ्टवेयर से संबंधित प्रश्न के लिए राज्य हेल्पलाइन 104 का उपयोग (जिसका उपयोग 1075 के अतिरिक्त किया जाएगा) कर रहे हैं। साथ ही बीमारी को फैलने से रोकने के लिए सेशन स्थान पर संक्रमण नियंत्रण निर्देशों का पालन और प्रबंधन भी किया जा रहा है।
बहरहाल उम्मीदें ये ही लगाई जा रही हैं की नया साल नई उमंग नया उत्साह लेकर आए और लोगों को इस कोरोना महामारी से निजात मिल सके।
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