राजनीति कई बार सच पर हावी हो जाती है और राजनेता अपने निजी लाभ के कारण स्ता और ताकत का दुरपयोग करने पर उतर आते हैं। और इस पूरे खेल में नेताओं को ईमानदार लोग और विशेष रूप से ईमानदार नौकरशह रास्ते का कांटा लगने लगते हैं। पिछले दिनों एक मामला चर्चा में था जब SDM पालमपुर ने जब वोटर लिस्ट में गड़बड़ी करने से मना कर दिया था तो एक राजनेता ने मुख्यमंत्री से झूठ बोलकर उनको काजा ट्रांसफर कर सजा दे दी थी। मगर ये स्थिति कभी रुकती नहीं है सिद्धांतों और हितों के टकराव जारी रहते हैं… ताज़ा मामला इसकी गवाही देता है एक और राजनेता खनन माफिया को संरक्षण देने के लिए एक बड़े पुलिस अफसर पर लगातार दबाव बना रहे हैं। और अफ़सर को तंग आकर सरकार से ट्रांसफर मांग करनी पड़ी। हालांकि भ्रष्टाचार के आरोप के चलते नेता विशेष पहले ही सरकार में एक बड़ा ओहदा गंवा चुके हैं। मगर अभी भी स्त्ता का नशा नहीं उतरा और कहानी वही है
बड़े पुलिस अफसर ने जब राजनेता को खनन माफिया का संरक्षण करने से मना किया तो खूब हंगामा हो रहा है। खनन माफिया के मामले में राजनेता और बड़े पुलिस अफसर के बीच गहमागहमी इतनी ज्यादा बढ़ गई है कि मामला मुख्यमंत्री तक पहुंच चुका है। पुख्ता आधिकारिक सूत्रों के अनुसार अब दुखी होकर पुलिस अफसर ने सरकार को अपनी ट्रांसफर कांगड़ा जिला से कहीं और करने के लिए निवेदन कर दिया है।
अब माना जा रहा है कि सरकार भी शायद पुलिस अफसर की ट्रांसफर कहीं और कर दे। मगर सवाल यह उठता है कि आखिर राजनेता खनन माफिया को संरक्षण दे कर पुलिस अफसर पर दबाव क्यों बना रहा है। आखिर जो ईमानदारी पर भारी पड़ रहा। ख़ैर ये सब तो अब वक़्त ही बता पायेगा की इन राजनेता और खनन माफिया के बीच क्या संबंध है या किस स्वार्थ से एक खनन माफिया को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। अब आगे देखना दिलचस्प होगा कि क्या एक ईमानदार अफसर के लिए केवल अपना काम भी सही तरीके से करना कठिन हो जाएगा या “गुड गवर्नेस” की बात करने वाली पार्टी की सरकार कोई कड़ा फैसला लेती है।


