न्यूज़ डेस्क। बीते लगभग डेढ़ साल से कोरोना महामारी के चलते दुनिया भर में पढ़ाई प्रभावित हुई है, और अधिकतर शैक्षणिक संस्थान ऑनलाइन क्लासेस के द्वारा चल रहे हैं। मगर भारत की उच्च शैक्षणिक संस्थानों की बात करें तो इनके हालातों में पिछले 5 साल में कोई अधिक बदलाव या विकास विश्व स्तर पर तो देखने को नहीं मिला है। लगातार पांचवे साल भी, दुनिया की शीर्ष 200 यूनिवर्सिटीज की सूची में भारत की स्थिति जस की तस बनी हुई है। भारत देश में जिन संस्थानों की गणना सबसे बेहतरीन संस्थानों में होती है, जैसे IIT-Bombay, IIT-Delhi और बेंगलूरु का Indian Institute of Science (IISc) और के अलावा भारत के किसी दूसरे शिक्षण संस्थान ने भी टॉप-200 की इस सूची में कोई स्थान प्राप्त नहीं किया है।
क्यूएस रैंकिंग में टॉप-200 के बाद अगर टॉप-1000 की बात करें तो यहां पर भी भारत की स्थिति में पिछले 5 सालों से बेहतरी के लिए कोई बदलाव नज़र नहीं आता। इस बार की रैंकिंग में टॉप-1000 में भारत से 21 संस्थानों को शामिल किया गया है जोकि 2020 में 23, 2019 में 24और 2018 में 20 थे। जिसे देखने के बाद यह अंदाजा लगाया जा सकता है, कि भारत में उच्च शिक्षण संस्थान हो की व्यवस्था और उनकी ओवरऑल रैंकिंग में गिरावट ही आई है।
क्यूएस द्वारा जारी बयान के मुताबिक भारतीय यूनिवर्सिटीज ने अकादमिक प्रतिष्ठा और शोध प्रभाव को लेकर अपने में सुधार किया है लेकिन टीचिंग कैपिसिटी के मामले में अभी भी स्थिति बेहतर नहीं हो पाई है। देश का कोई भी संस्थान फैकल्टी-स्टूडेंट रेशियो में टॉप 250 में भी शामिल नहीं है।
दुनिया भर के शीर्ष 1000 में शामिल 22 भारतीय संस्थानों में चार की रैंकिंग पिछले 12 महीनों में गिरी है। हालांकि आईआईटी बॉम्बे लगातार भारत का सबसे बेहतर उच्च शिक्षा संस्थान बना बना हुआ है। मगर पिछले साल की तुलना में 5 स्थान की गिरावट के बाद यह संस्थान इस रैंकिंग में 177वें स्थान पर रखा गया है। इसके अलावा आईआईएससी, आईआईटी रूड़की और ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी की रैंकिंग में भी गिरावट आई है। इसके अलावा अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू), बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) व अमृता विश्व विद्यापीठम अब टॉप-1000 में नहीं रही और अब वे टॉप 1001-1200 के बीच पहुंच गए हैं।
अच्छी ख़बर ये है कि भारत के सात संस्थानों आईआईटी दिल्ली, आईआईटी मद्रास, आईआईटी कानपुर, आईआईटी खड़गपुर, आईआईटी गुवाहाटी, आईआईटी हैदराबाद और सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी की रैंकिंग बेहतर हुई है। तो वहीं जवाहर लाल यूनिवर्सिटी (जेएनयू), पांडिचेरी यूनिवर्सिटी, आईआईटी भुबनेश्वर और शिक्षा ‘ओ’ अनुसंधान पहली बार इस सूची में जगह बना पाए हैं।

