चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस में कई दिनों से चल रहे आंतरिक सियासी घमासान को सुलझाने के लिए, अब कांग्रेस आलाकमान भी इस दंगल में कूद पड़ा है। बीते दिनों से पंजाब कांग्रेस के भीतर चल रही आपसी कलह को सुलझाने के लिए कांग्रेस हाईकमान ने 3 सदस्यों वाली कमेटी का गठन किया गया है, जो इस आपसी कलह को सुलझाने के लिए कोई रास्ता अख्तियार करेगी। बता दें इस कमेटी की बागडोर राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को सौंपी गई है। इसके अलावा इस कमेटी में पूर्व सांसद जेपी अग्रवाल के साथ-साथ पंजाब कांग्रेस के प्रभारी हरीश रावत भी शामिल हैं।
पार्टी सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुनील जाखड़ कमेटी के पंजाब दौरे से पहले ही डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं। नाराज मंत्रियों और विधायकों को मनाने के लिए वन-टू-वन मीटिंग की तैयारी है। कमेटी की पहली मीटिंग पार्टी मुख्यालय में शनिवार सुबह होगी। पंजाब कांग्रेस प्रभारी हरीश रावत कि ओर से सभी नेताओं से कहा गया है कि आपसी मतभेद की चर्चा सार्वजनिक मंचों पर न करें।
कैबिनेट मंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर रंधावा, सांसद प्रताप बाजवा और विधायक परगट सिंह ने सीएम पर सवाल उठाए थे। नाराज नेता प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले थे पर हाईकमान ने रोक दिया था। नवजोत सिद्धू द्वारा गुप्त मीटिंगों का दौर अभी भी दौर जारी है।
ऐसे में अब देखना ये होगा पंजाब कांग्रेस के भीतर जारी ये कलह कांग्रेस आलाकमान के हस्तक्षेप के बाद कौन सा रुख अख्तियार करती है। यह तो फिलहाल वक़्त के गर्भ में है मगर बड़ी बात ये है कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ अपनी ही पार्टी के कई नेता खड़े हैं, फ़िर वो बात सिद्धू की हो या कांग्रेस नेता परगट सिंह की। ख़ैर विवाद बड़ता देख कर कांग्रेस हाईकमान को इसमें शामिल होना पड़ा।







