अरविंद कंवर,सम्पादक खबर नाउ
बीते 9 जून को काँग्रेस को एक बड़ा झटका तब लगा जब उत्तर प्रदेश से संबंध रखने वाले जितिन प्रसाद भाजपा में शामिल हो गए. उनके इस फैसले पर काँग्रेस के नेताओं की तल्खी भरी टिप्पणीयां आनी जाहिर थी. ऐसे में कुछ ने उन्हें धोखेबाज कहा, किसी ने अति महत्वाकांक्षी, कोई यह कह रहा है कि जब सब कांग्रेस ने दिया तो छोड़ा क्यों? पर किसी ने यह नहीं सोचा कि उनके पास विकल्प क्या था. बात केवल उनकी नहीं मसलन और भी युवा काँग्रेस के कई नेता जो या तो चले गए हैं या जाने को तैयार हैं.
प्रोफेशनल राजनीतिक दल के रूप में उभरी बीजेपी…
मोदी दौर या मोदी लहर आने के बाद भाजपा ने अपने आप को एक प्रोफेशनल राजनीतिक दल के रूप में स्थापित करना शुरू किया. वहीं कांग्रेस केवल मोदी-मोदी चीखती रही और अपने दल को नहीं सम्भाल पाई. एक के बाद एक राज्य खोए, नेता चले गए और यहां तक कि गांधी परिवार से बाहर ये पार्टी एक अध्यक्ष तक नहीं ढूंढ पाई.
भाजपा ने तिनके-तिनके से जोड़ा आशियां…
दूसरी तरफ भाजपा हर मौके को अपने लिए सकरात्मक रूप से जोड़ती गई. पार्टी सत्ता का परिवर्तन नितिन गडकरी से राजनाथ सिंह और फिर राजनाथ सिंह से अमित शाह, अब जगत प्रकाश नड्डा को आसानी से हुआ. इन सभी अध्यक्षों ने पार्टी को मजबूत किया.
युवा शक्ति को सही दिशा नहीं दे पाई काँग्रेस…
दूसरी तरफ अगर कांग्रेस की बात करें तो अपने संगठन पर कुछ खास नहीं कर पाई और ना अपने युवा नेताओं का सही ढंग से इस्तेमाल कर पाई.

जितिन प्रसाद, वर्तमान भाजपा नेता है, पूर्व में कांग्रेस नेता रहे।
कुछ यूं शुरू हुआ सिलसिला…
यही कारण है कि आज हिम्मता बिश्वा असम के मुख्यमंत्री हैं, वहीं मध्यप्रदेश में काँग्रेस ने अपनी सरकार गंवाई. क्योंकि सिंधिया जैसे युवा को नजरअंदाज करके कमलनाथ को मुख्यमंत्री बनाया गया.यही हाल राजस्थान का है जहां सचिन पायलट को नजरअंदाज करके अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री बनाया.
खुद काँग्रेस ने पैदा किया विरोध
काँग्रेस के अंदर का विरोध खुद काँग्रेस ने पैदा किया है और उसके लिए भाजपा को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता.
जाने वालों की बढ़ रही लिस्ट…
हिम्मता गए, सिंधिया गए, जितिन गए. निश्चित तौर पर और भी जाएंगे. अपना भविष्य सबको प्यारा है. अगर पार्टी हाइकमान फैसले नहीं ले सकता, संघटन को मजबूत नहीं कर सकता तो उन्हें कोई अधिकार नहीं है जाने वाले को गलत ठहराने का या उन्हें दोष देने का. बहरहाल काँग्रेस पार्टी को अपना घर ठीक करना होगा नहीं तो आने वाले समय में कई विदाई निश्चित हैं.






