शिमला। औषधि नियंत्रण प्रशासन हिमाचल प्रदेश द्वारा उन दवा निर्माताओं पर कार्रवाई की गई जो ऐसी दवाओं का निर्माण कर रहे हैं जिनका नशीली दवाओं के रूप में दुरुपयोग होने की संभावना है। इसकी जानकारी औषधि नियंत्रण विभाग हिमाचल प्रदेश के द्वारा एक अधिसूचना जारी करके दी गई।
प्रदेश में कुछ दवाओं को नशे के तौर पर इस्तेमाल किए जाने के कारण सितंबर 2016 से ही चार दवाओं स्यूडोफेड्रिन, एफेड्रिन, डिफेनोक्सिलेट और बुप्रेनोर्फिन के निर्माण पर प्रतिबंध है। और इसको लेकर समय समय पर अभियान और छापेमारी ड्रग इंस्पेक्टर द्वारा और पुलिस की सहायता से की जाती रही है और ऐसी दवाओं के निर्माण में लगे निर्माताओं की सूची पुलिस से साझा की जाती रही है।
नशीली दवाओं के अवैध उत्पादन को रोकने के लिए राज्य स्तर पर मार्च 2019 से संयुक्त कार्यबल का गठन किया गया, जिसने जिला स्तर पर हिमाचल पुलिस, नारकोटिक कंट्रोल ब्यूरो और हिमाचल प्रदेश औषधि नियंत्रण प्रशासन के अधिकारी शामिल हैं।
यह संयुक्त कार्य बल उन दवा निर्माताओं का निरीक्षण करता है जो ऐसी दवाओं का निर्माण कर रहे हैं जिनका नशे के रूप में दुरुपयोग की संभावना है। साथ ही इस संयुक्त कार्यबल के पास ऐसी दवाओं के निर्माण में लगी विनिर्माण इकाइयों की जांच करने का भी दायित्व है।
ऐसी ही दवाओं के नशीली दवाओं के रूप में दुरुपयोग, को रोकने और और ऐसे अपराध में लिप्त लोगों को पकड़ने के लिए राज्य में ड्रग्स कंट्रोलर के आधीन 5 टीमों का गठन किया गया जिसमें ड्रग्स कंट्रोलर, 4 सहायक औषधि नियंत्रक समेत कुल 23 अधिकारी शामिल थे। इन टीमों ने जिला सोलन, ऊना, सिरमौर और कांगड़ा जिले के अंदर 53 विनिर्माण इकाइयों का निरीक्षण किया गया। इन दवा कंपनियों का पिछले एक सप्ताह में निरीक्षकों की टीम द्वारा पूरी तरह से निरीक्षण किया गया, जिसमें स्थानीय पुलिस की भी मदद ली गई।
53 दवा निर्माण इकाइयों के निरीक्षण में 43 दवा निर्माण इकाइयों में नियमों के उल्लंघन की कोई सूचना नहीं मिली है।
हालांकि 10 दवा निर्माण इकाइयों की जांच अभी चल रही है, और इनमें से 2 मामलों में अभी उत्पादन को बंद करने के आदेश दिए गए हैं। जबकि 2 अन्य मामलों में स्टॉक फ्रीज कर दिया गया है और बाकी 6 मामलों में नोटिस जारी किए गए हैं।
हिमाचल के दवा मैन्युफैक्चरिंग स्टेट होने के नाते, राज्य पहले से ही बहुत सारे उपाय और सावधानियां बरत रहा है। परंतु दवा विपणन के संबंध में हाल के घटनाक्रम और अधिसूचना दिनांक 11.2.2020 को ध्यान में रखते हुए, निर्माताओं द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेजों के संबंध में नए एसओपी तैयार किए गए हैं कि कैसे उत्पाद लाइसेंस प्रदान किया जाना है और निर्माता के पास किन किन दवाओं के निर्माण का अधिकार प्राप्त है । इसके अलावा इन दवा निर्माताओं का संबंधित औषधि निरीक्षक को मासिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के अतिरिक्त बिक्री की सूचना देना भी इन s.o.p. में शामिल है।
जैसा इन एसओपी के अनुसार, उत्पाद लाइसेंस के लिए आवेदन करते समय, निर्माता को विपणक के साथ समझौता और लाइसेंसिंग प्राधिकारी को उसका ड्रग्स लाइसेंस प्रस्तुत करना होगा। प्रेषण के समय अपने कारखाने से इन दवाओं के बारे में, उसे स्थानीय औषधि निरीक्षक, अधीक्षक को भी सूचित करना होगा।
इसके अतिरिक्त उसे उस क्षेत्र की पुलिस और जिस राज्य में बिक्री होने वाली है उस राज्य के ड्रग कंट्रोलर को ईमेल के माध्यम से जानकारी साझा करनी होगी। इससे दवाओं के बारे में जानकारी और दवाओं की ट्रैकिंग करने में मदद मिलेगी। इन एसओपी से निर्माताओं को अवगत करा दिया गया है
इसके अलावा, इन दवाओं के संबंध में निर्माताओं को दी जाने वाली उत्पाद सम्बन्धी अनुमतियों
की भी समीक्षा की गई और यह भी सुनिश्चित किया गया कि सभी विनिर्माता जो दवा निर्माण कर रहे हैं और इन ड्रग्स का दुरुपयोग ना कर रहे हो और इनके द्वारा राज्य सरकार के द्वारा निर्धारित सभी प्रावधानों का कड़ाई से पालन किया गया अथवा नहीं।







