स्पेशल डेस्क- हिमाचल प्रदेश की आर्थिक व्यवस्था में सेब का सबसे महत्वपूर्ण योगदान रहता है। अकेले सेब पर अढ़ाई लाख से अधिक परिवारों की रोजी रोटी निर्भर रहती है। प्रदेश की समृद्धि के पीछे भी सेब को महत्वपूर्ण कारण माना जाता है, लेकिन इस बार अच्छी फ्लावरिंग के बावजूद ड्राई-स्पेल और असामान्य तापमान ने बागवानों को चिंता में डाल दिया है।
बारिश नहीं तो पड़ सकती है डॉपिंग की मार
असामान्य गर्मी के कारण खासकर कम ऊंचे क्षेत्रों में सेब की फसल पर संकट नजर आ रहा है, क्योंकि बगीचों में नमी सूखती जा रही है। दूसरी और सभी फूल सेब के दानों में तब्दील हो गए हैं। ऐसे में नमी बरकरार रखने के लिए बारिश की सख्त जरूरत है। यदि ड्राई स्पेल नहीं टूटा तो जो ड्रॉपिंग जून महीने में होती थी, वह अप्रैल-मई में ही देखने को मिल सकती है।
इन क्षेत्रों में उपयुक्त माना जा रहा मौसम
प्रदेश के 7500 फीट से अधिक अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में इन दिनों फ्लावरिंग है। ऐसे क्षेत्रों के लिए मौसम अभी उपयुक्त माना जा रहा है, क्योंकि फ्लावरिंग के दौरान अच्छी फसल के लिए मौसम का साफ रहना जरूरी होता है। बागवानी विशेषज्ञों की मानें तो 10 से 12 दिन बाद ऊंचे क्षेत्रों में भी बारिश नहीं होने पर नुकसान हो सकता है। शिमला, चंबा, कुल्लू, मंडी, सोलन के कम ऊंचे क्षेत्रों के सेब बगीचों पर ज्यादा असर हो सकता है।
इस बार गर्मी तोड़ रही रिकॉर्ड
हिमाचल प्रदेश में इस बार गर्मी सभी रिकॉर्ड तोड़ रही है। मार्च महीने में बीते 60 से 70 सालों के सभी रिकॉर्ड टूट चुके है। यही वजह है कि सेब की फ्लावरिंग इस बार 10 से 15 दिन पहले हुई है। अब तक का मौसम सेब के लिए उपयुक्त माना जा रहा है, लेकिन अब बागवान बारिश के इंतजार में टकटकी लगाए बैठे हैं।
गर्मी बनी सेब के लिए संकट,बागवानों की बढ़ी चिंता
स्पेशल डेस्क- हिमाचल प्रदेश की आर्थिक व्यवस्था में सेब का सबसे महत्वपूर्ण योगदान रहता है। अकेले सेब पर अढ़ाई लाख से अधिक परिवारों की रोजी रोटी निर्भर रहती है। प्रदेश की समृद्धि के पीछे भी सेब को महत्वपूर्ण कारण माना जाता है, लेकिन इस बार अच्छी फ्लावरिंग के बावजूद ड्राई-स्पेल और असामान्य तापमान ने बागवानों को चिंता में डाल दिया है।
बारिश नहीं तो पड़ सकती है डॉपिंग की मार
असामान्य गर्मी के कारण खासकर कम ऊंचे क्षेत्रों में सेब की फसल पर संकट नजर आ रहा है, क्योंकि बगीचों में नमी सूखती जा रही है। दूसरी और सभी फूल सेब के दानों में तब्दील हो गए हैं। ऐसे में नमी बरकरार रखने के लिए बारिश की सख्त जरूरत है। यदि ड्राई स्पेल नहीं टूटा तो जो ड्रॉपिंग जून महीने में होती थी, वह अप्रैल-मई में ही देखने को मिल सकती है।
इन क्षेत्रों में उपयुक्त माना जा रहा मौसम
प्रदेश के 7500 फीट से अधिक अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में इन दिनों फ्लावरिंग है। ऐसे क्षेत्रों के लिए मौसम अभी उपयुक्त माना जा रहा है, क्योंकि फ्लावरिंग के दौरान अच्छी फसल के लिए मौसम का साफ रहना जरूरी होता है। बागवानी विशेषज्ञों की मानें तो 10 से 12 दिन बाद ऊंचे क्षेत्रों में भी बारिश नहीं होने पर नुकसान हो सकता है। शिमला, चंबा, कुल्लू, मंडी, सोलन के कम ऊंचे क्षेत्रों के सेब बगीचों पर ज्यादा असर हो सकता है।
इस बार गर्मी तोड़ रही रिकॉर्ड
हिमाचल प्रदेश में इस बार गर्मी सभी रिकॉर्ड तोड़ रही है। मार्च महीने में बीते 60 से 70 सालों के सभी रिकॉर्ड टूट चुके है। यही वजह है कि सेब की फ्लावरिंग इस बार 10 से 15 दिन पहले हुई है। अब तक का मौसम सेब के लिए उपयुक्त माना जा रहा है, लेकिन अब बागवान बारिश के इंतजार में टकटकी लगाए बैठे हैं।


