खबरनाउ ब्यूरो: WHO ने मंकीपॉक्स बीमारी का नाम बदलकर अब ‘एमपॉक्स’ (MPOX) कर दिया है और यह ऐलान दुनिया भर के विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श कर रखा गया है। दरअसल, WHO को लगातार यह शिकायत मिल रही थी कि मंकीपॉक्स नाम का इस्तेमाल आपत्तिजनक और नस्लवादी टिप्पणियों के लिए किया जा रहा है, जिसके बाद इसका नाम बदलने पर विचार शुरू हुआ। गौरतलब है कि मंकीपॉक्स और एमपॉक्स दोनों ही नाम का इस्तेमाल होगा लेकिन अगले एक साल में मंकीपॉक्स नाम को पूरी तरह हटा दिया जाएगा।
आपको बता दें कि सबसे पहले साल 1958 में डेनमार्क में शोध के लिए रखे गए बंदरों में इस बीमारी के वायरस की जांच हुई थी। हालांकि यह बीमारी कई जानवरों में पाई जाती है, और चूहों आदि जैसे रोडेन्ट्स जानवरों में खूब मिलती है। इस साल की शुरुआत में कई देशों में इस बीमारी से बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए थे। यह वायरस पशुओं से फैलना शुरू हुआ और इंसानों में बहुत तेजी से फैला। इस साल इसके केस भारत सहित कई देशों में भी मिले। इस साल तक़रीबन 110 देशों से लगभग 81,107 पुष्ट मामले मंकीपॉक्स के मिले, वहीँ WHO के अनुसार, लगभग 55 लोगों की मौत भी दुनियाभर में इस साल मॉकीपॉक्स से हुई।
मंकीपॉक्स बीमारी चेचक की तरह होती है जिसके संक्रमण के 7 से 10 दिन में व्यक्ति में लक्षण दिखने लगते हैं। इसमें लक्षण को तौर पर संक्रमित व्यक्ति को बुखार महसूस होता है, और शरीर में दर्द और थकान भी महसूस हो सकती है। संक्रमण के दूसरे चरण में त्वचा पर कहीं-कहीं गांठ दिखने लगती हैं और चकते आ जाते हैं और फिर यही चकत्ते बडे़ दानों में बदल जाते हैं। बहरहाल नाम बदल दिया गया है लेकिन मंकीपॉक्स और एमपॉक्स दोनों ही नाम का इस्तेमाल होगा लेकिन अगले एक साल में मंकीपॉक्स नाम को पूरी तरह हटा दिया जाएगा।






