ब्यूरो,खबरनाउ: प्रदेश के 140 कालेजों में 40 दिनों के भीतर छात्रों का रिजल्ट आए, इसके लिए ईआरपी यानि एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग सिस्टम लगाया गया था, लेकिन आठ करोड़ से एचपीयू में लगे इस सिस्टम को अब नई सरकार बंद कर सकती है। कारण यह कि जिस मकसद से इस सिस्टम को लगाया गया था, उसे एचपीयू पूरा ही नहीं कर पाया।
इसी साल इस सिस्टम से ऑनलाइन स्कैनिंग के जरिए पेपर चैक किए गए। 40 दिन के बजाय चार महीने बाद पेपर का रिजल्ट तो आया, लेकिन इस रिजल्ट ने छात्रों के होश उड़ा दिए। यूजी प्रथम वर्ष में 80 फीसदी छात्र फेल हो गए और अभी तक भी कमेटी उसकी रिपोर्ट नहीं दे पाई है कि खराब रिजल्ट का क्या कारण रहा है। यही कारण है कि अब ऑनलाइन सिस्टम से पेपर चैकिंग को बंद कर ऑफलाइन तरीके से ही पेपर चैक करने का नया फार्मूला नए सत्र में लागू हो सकता है। आज तक एचपीयू इस सिस्टम की खामियों को नहीं सुधार पाया है। इस पर आठ करोड़ रुपए खर्च किए गए थे।
नैक की टीम ने जब एचपीयू का ग्रेड तय किया, तो उसमें रिजल्ट भी एक मानक रहा। ऐसे में इसका सीधा असर ग्रेडिंग पर भी देखा गया और एचपीयू को ए ग्रेड मिला। विश्वविद्यालय प्रशासन ने जब इस प्रणाली को अपनाया था, उस समय पूरे प्रदेश भर में इसके लिए वाहवाही लूटी थी। उस समय विश्वविद्यालय प्रशासन ने दावे किए थे कि अब छात्रों को घर बैठे सुविधा मिलेगी। इस सुविधा से छात्र अपने माइग्रेशन, रजिस्ट्रेशन, फीस, परीक्षा फार्म व परीक्षा परिणाम संबंधित काम ऑनलाइन माध्यम से आसानी से करवा सकते हैं, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन के यह सब दावे खोखले साबित हुए हैं।







