स्पेशल डेस्क, नई दिल्ली : विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पूर्वी लद्दाख के हालात को ‘बहुत गंभीर’ करार दिया है। उन्होंने कहा है कि ऐसे हालात में दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक स्तर पर बहुत गहन विचार-विमर्श की जरूरत है। एक अंग्रेजी दैनिक के संवाद सत्र को संबोधित करते हुए चीन सीमा विवाद पर जयशंकर ने कहा, ‘सीमा की स्थिति को संबंधों की स्थिति से अलग करके नहीं देखा जा सकता। मैंने इस पुस्तक को गलवान घाटी की दुर्भाग्यपूर्ण घटना से पहले लिखा था।
पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में 15 जून को संघर्ष में 20 भारतीय सैन्यकर्मियों के शहीद होने के बाद एलएसी पर तनाव काफी बढ़ गया था। चीनी जवान भी हताहत हुए लेकिन पड़ोसी देश ने उनका ब्योरा नहीं दिया। अमेरिका की एक खुफिया रिपोर्ट के अनुसार चीन के भी 35 जवान मारे गये थे। अपनी नई प्रकाशित पुस्तक ‘द इंडिया वे’ का जिक्र करते हुए विदेश मंत्री ने कहा, सीमा पर अगर अमन-चैन नहीं रहता तो बाकी रिश्ते जारी नहीं रह सकते क्योंकि स्पष्ट रूप से संबंधों का आधार शांति ही है।
जयशंकर 10 सितंबर को मॉस्को में शंघाई सहयोग संगठन के विदेश मंत्रियों की बैठक से इतर वांग से मुलाकात कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास के समय से ही समस्याएं चली आ रही हैं। जब उनसे पूछा गया कि वह अपने चीनी समकक्ष को क्या संदेश देंगे तो जयशंकर ने कहा, मैं उन्हें वास्तव में जो कहूंगा, वह जाहिर है कि आपको नहीं बता सकता।
हालांकि उन्होंने कहा कि उनका रुख सीमा पर शांति बनाये रखने के व्यापक सिद्धांत पर केंद्रित ही होगा ताकि संबंधों का समग्र विकास हो जो पिछले 30 साल के रिश्तों में झलका है। विदेश मंत्री ने दोनों देशों के बीच सीमा प्रबंधन पर 1993 से हुए अनेक समझौतों की भी बात की उन्होंने कहा कि इनमें स्पष्ट शर्त है कि सीमा पर बलों का स्तर न्यूनतम रहेगा। उन्होंने कहा, अगर ऐसा नहीं होता तो बहुत ही गंभीर सवाल उठते है। यह बहुत गंभीर स्थिति मई की शुरूआत से है और इसमें दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक स्तर पर बहुत गहन विचार-विमर्श की आवश्यकता है।







