संवाददाता, शिमला: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद शिमला और सुन्नी महानगर द्वारा सामाजिक समरसता के जननायक भारत रत्न, संविधान निर्माता, बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी के पुण्यतिथि के अवसर पर कोटशेरा व सुन्नी महाविद्यालय में संगोष्ठी कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सत्या कौंडल,महापौर नगर निगम शिमला व मुख्य वक्ता विक्रांत चौहान, प्रान्त सह मंत्री अभाविप हिमाचल प्रदेश एवं सुन्नी में मुख्य वक्ता के रूप में नरेंद्र भारद्वाज तहसील संयोजक शिमला उपस्थित रहें। इस कार्यक्रम में हिमाचल सरकार द्वारा जारी सभी दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए लगभग 50 लोगों को ही शामिल किया गया और सोशल डिस्टेंसिंग का भी विशेष ध्यान रखा गया।
मुख्य वक्ता हिमाचल प्रांत मंत्री विक्रांत चौहान ने कहा डॉ. बाबासाहब आम्बेडकर नाम से लोकप्रिय, भारतीय बहुज्ञ, विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ, और समाजसुधारक थे। उन्होंने दलित बौद्ध आंदोलन को प्रेरित किया और अछूतों से सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध अभियान चलाया था। श्रमिकों, किसानों और महिलाओं के अधिकारों का समर्थन भी किया था। डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी जिस प्रकार अपने जीवन में समाजिक कुरीतियों का विरोध किया। विद्यार्थी परिषद में उनके विचारों को लेकर आज के दिन पूरे भारतवर्ष में समरसता दिवस के रूप में मनाती है। उधर सुन्नी के मुख्य वक्ता नरेंद्र भारद्वाज जी ने अंबेडकर जी के विचारों पर प्रकाश डालते हुए आज के समय में भारतीय समाज में फैली हुई कुरीतियों पर विचार साझा किए तथा उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों से आग्रह किया कि आप सभी अंबेडकर जी के विचारों पर चल कर इस देश से सामाजिक भेदभाव को समाप्त करने में अपना योगदान दे।
इस मौके पर मुख्य अतिथि सत्या कौंडल ने कहा कि डॉ. भीमराव को भारतीय संविधान के जनक के रूप में भी जाना जाता है। देश की भलाई के लिए किए गए कार्यों के कारण उन्हें भारत रतन की उपाधी से भी सम्मानित किया जा चुका है। अंबेडकर बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के धनी थे । लेकिन जातीय छुआछूत की वजह से उन्हें प्रारंभिक शिक्षा लेने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। सत्या कौंडल जी ने बताया कि छात्रों को बाबा साहेब के संघर्ष से सीख लेनी होगी। तभी बड़ी से बड़ी मुश्किल को आसानी से हल कर सकेंगे। अपने विकास के साथ ही समाज को भी विकास और समानता का रास्ता दिखाएं।
शिमला महानगर मंत्री निखिल ठाकुर ने जानकारी देते हुए बताया कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के वार्षिक आयोजनों में समरसता दिवस को महत्वपूर्ण माना जाता है। संगठन किसी भी जाति, धर्म के लोगों के साथ भेदभाव नहीं रखती, इसलिए प्रत्येक वर्ष लोगों के बीच जाकर भीमराव अंबेडकर के आदर्शो पर अमल करने की बात करते हैं। महानगर मंत्री ने बताया कि आयोजन हमारे सभी साथियों के लिए उत्साहवर्धक हैं। हम समाज के वंचित वर्ग के बीच जाकर उनके साथ खाना बनाकर, उनसे बातचीत करके उनकी परेशानियां और अन्य विचारधारा द्वारा फैलाए गए भ्रम को भी सुनते हैं। उनके बीच जाकर साथ खाने से अपनापन लगता है। क्योंकि अंबेडकर ने जिस तरह से राष्ट्र निर्माण में योगदान दिया है, वह देश को मजबूत करता है। एबीवीपी का मकसद छात्रों के बीच जाकर उनसे मिलना या उनका विचार जानना ही नहीं, बल्कि इस दिवस के उद्देश्यों से जोड़ना है।







