अजय भास्कर ( खबर नाउ) : 31 मार्च को दोपहर को अचानक हिमाचल के अधिकारियों, मीडिया के लोगों और अन्य बुद्धिजीवियों के मोबाईल मे एक खबर चलने लगी कि प्रदेश के चंडीगढ़ स्थित हिमाचल भवन जो कि कोरोना की आपदा मे चंडीगढ़ में पढ़ रहे हिमाचल के बच्चों के लिए खोला गया था, उसमें आम आदमी के बच्चों को रहने को नहीं मिल रहा है पर आईएएस के बच्चे ठहराए जा रहे हैं और कैमरे में बकायदा एक सरकारी कार से बच्चों को उतरते भी दिखाया गया और रिपोर्टर अचानक गरीब और जरूरत मंद हिमाचल के लोगों का चंडीगढ़ में राबिनहुड बन गया और अधिकारी विलेन. पर शाम होते होते ख़बर की तह पर पहुंचा गया तो माजरा कुछ और निकला. पहले तो वहाँ किसी भी अधिकारी का कोई बच्चा नहीं मिला ( मिल भी जाता तो कोई अपराध नहीं था, यही अधिकारी इस आपदा मे आम जनता के लिए दिन रात किए हुए हैं), दूसरा जिस गाड़ी को कैमरे मे बार बार दिखाया जा रहा था, वो हिमाचल सरकार ने चंडीगढ़ में जरूरतमंद की सहायता के लिए ही हिमाचल भवन को दी थी तो वो किसी अधिकारी नहीं थी और तीसरा जिस लड़की को अधिकारी का बच्चा बताया जा रहा था उसके पिताजी के देहांत को 2 वर्ष हो गए थे तो सवाल यह है कि फिर यह खबर किसलिए चली. अभी सोच विचार चल ही रहा था कि अचानक से कॉंग्रेस के विधायक और उनके बेटे का एक वेब चैनल पर अचानक से इस खबर पर इंटरव्यू आ जाता है. अब सवाल यह उठ रहा है कि एक न्यूज चैनल की खबर पर दूसरा चैनल विधायक का इंटरव्यू क्यों ले रहे थे, यह एक समझ से बाहर की बात है क्योंकि अमूमन पत्रकारिता मे यह देखा गया है कि एक चैनल या अखबार की खबर को दूसरा चैनल या अखबार प्रोत्साहित नहीं करते हैं पर इस खबर में उल्टा हुआ और पिता और पुत्र का वक्तव्य काफी तेजी से आया! अब क्यों और कैसे आया इसकी तहकीकात पुलिस जांच में होगी क्योंकि इस केस में अब पुलिस ने FIR दर्ज कर ली और उम्मीद है कि जल्दी ही दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा !







