- मनु ठाकुर (खबर नाउ) ऊना
हिमाचल प्रदेश कोरोना वायरस को लेकर पिछले कुछ समय से बचा हुआ था और प्रशासन भी हर ज़िला स्तर पर संतुष्ट था पर अचानक से 2 अप्रैल को 3 केस ऊना से आ गए और वो भी ऊना के निवासी नहीं हैं. निजामुद्दीन वाली घटना का असर अब हिमाचल में भी नजर आने लगा है परन्तु कुछ सवाल तो जाहिर तौर पर सामने आयेंगे. जब निजामुद्दीन की घटना के बाद advisory जारी की गई और राज्य को सूची सौंपी गई तो क्या इन लोगों का नाम सूची में नहीं था और अगर नहीं तो कहाँ चूक हुई और अगर नाम था तो फिर प्रदेश में कहाँ चूक हुई. दूसरी क्या इस घटना के बाद प्रदेश की मस्जिदों की तलाशी ली गई या नहीं. क्या प्रदेश का सूचना तंत्र इस जानकारी को हासिल करने में चूका है जो ये लोग यहां पहुंच गए. बहरहाल ये सवाल जवाब तो ढूँढते रहेंगे पर अभी प्रदेश के लिए सब से बड़ी चुनौती यह है कि ऐसे कितने यहां आकर छुपे हैं और उनकी हालत क्या है. हालांकि प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में छानबीन शुरू तो हो गई है पर यह एक सहमी स्थिति है. ऊना वाले प्रकरण से एक शिक्षा यह भी मिलती है कि जब केंद्र सत्कार ने 14 अप्रैल तक सब कुछ बंद किया है तो लोगों को इतनी सुविधाएं किसलिए दी जा रही थी. हर रोज कर्फ्यू घटाया या बढ़ाया क्यों जा रहा था. क्या हम 14 अप्रैल तक एक तरीके से इस लाकडाऊन का पालन नहीं कर सकते थे.






