शिमला: तारिक 14 जुलाई साल 2012, अपने आप में ऐतिहासिक महत्व से भरे-पड़े रिज मैदान स्थित गेयटी थिएटर के मंच पर थे, भारत के परमाणु व अंतरिक्ष कार्यक्रम के सूत्रधार रहे भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ° ए. पी. जे. अब्दुल कलाम। और जैसे छात्रों से सवाल-जवाब के उनके कई किस्से मशहूर हैं, वैसे ही जब एक छात्र ने पूछा कि विश्व शांति कैसे हासिल की जाए, जब पूरे विश्व में परमाणु हथियारों की होड़ मची हुई है। तो हमेशा की तरह अपने सरल और प्रभावशाली स्वभाव के साथ कलाम ने इस बात पर सहमति जताई कि दुनिया के सामूहिक विनाश से बचने के लिए विश्व को सामूहिक रूप से तत्काल परमाणु हथियार मुक्त होने आवश्यकता है। कलाम इस प्रश्न के जवाब में कहते हैं, अंतरराष्ट्रीय समुदायों के वैश्विक दबाव के द्वारा ही इस दिशा में वैश्विक सहमति बनाई जा सकती है कि एक परमाणु हथियारों से मुक्त विश्व की कल्पना की जा सके।
ये किस्सा तब का है जब अब्दुल कलाम भाषा, कला और संस्कृति विभाग, सेवा और पब्लिक रिलेशंस सोसाइटी ऑफ इंडिया के साथ संयुक्त रूप से हिमाचल प्रदेश कानूनी सेवा प्राधिकरण द्वारा “मौलिक कर्तव्यों” पर आयोजित एक संगोष्ठी में मुख्य भाषणकर्ता के तौर पर शिमला पहुंचे थे। कलाम बेहद कम ही मौकों पर शिमला आए, मगर उनकी हर यात्रा और हर एक भाषण ढेरों लोगों के लिए जीवंत पर्यन्त जीवित रहने वाला अनुभव है। शिमला में भी उन्होंने अनेकों विषयों और छात्रों के विभिन्न सवालों के जवाब दिए। इस मौके पर ने छात्रों को दिल की धार्मिकता, विकास के लिए सामाजिक जागृति और उत्कृष्टता के लिए जुनून जैसे मूल मंत्र साझा किए।
ट्रिब्यून की ख़बर के मुताबिक़ जब उनसे राष्ट्रपति भवन में राजनेताओं के साथ उनके अनुभव के बारे में पूछा गया तो उन्होंने टाल-मटोल किया और उनका संक्षिप्त उत्तर था “अच्छे लोग भी होते हैं और राष्ट्रपति के रूप में राजनेताओं के साथ व्यवहार करना पड़ता है,” ।
उन्होंने युवा वकीलों से आर्थिक क्रांति के दूसरे स्वतंत्रता आंदोलन को शुरू करने में भारत की मदद करने का आग्रह करते हुए उन्होंने कहा कि आदर्श स्थिति वह होगी जहां 70 प्रतिशत विकास और 30 प्रतिशत राजनीति हो। दुर्भाग्य से, स्थिति बिल्कुल उलट थी। भारत द्वारा कई क्षेत्रों में किए गए कदमों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि देश मुश्किल दौर से गुजर रहा है, लेकिन मध्यम वर्ग की उच्च क्रय शक्ति के साथ भारतीयों को बचाने और पूरी तरह से वैश्विक नहीं बनने की प्रवृत्ति ने भारत को मंदी से बचाया। उन्होंने आशावादी नोट पर कहा, “25 साल से कम उम्र के 60 करोड़ युवा शक्ति हमारी सबसे बड़ी ताकत है और वे सभी समस्याओं को दूर करने में हमारी मदद करेंगे।”
कलाम से उनके भारत का राष्ट्रपति बनने के सवाल पर उन्होंने छात्रों को सफलता का मंत्र देते हुए उन्होंने कहा, “यदि आपके पास दृढ़ता, एक महान लक्ष्य, परिश्रम और ज्ञान प्राप्त करने की भूख है, तो आकाश आपके लिए सीमा है और आप कुछ भी बन सकते हैं, यहां तक कि देश के राष्ट्रपति भी।”
देश के राष्ट्रपति कलाम, बैक बैंचर कलाम और न जाने लोग उन्हें कितने रूपों में याद करते हैं। ठीक आज ही के दिन साल 2015 में शिलांग में भाषण देने पहुंचे कलाम हमारे बीच नहीं रहे मगर लोग उनके किस्से और उनके कथन आज भी प्रेरणा स्त्रोत के रूप में देखते हैं।






