धर्मशाला: कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय सचिव एवं पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा ने भारतीय जनता पार्टी द्वारा की गई टिप्पणी को हास्यास्पद बताया है। भारतीय जनता पार्टी के नेता बड़े उत्साहित होकर कह रहे हैं की मुख्यमंत्री जयराम का 19 तारीख का दौरा धर्मशाला के विकास को चार चाँद लगाएगा। जिस पर सुधीर शर्मा ने कहा कि यह चार चाँद पूर्णिमा के नहीं बल्कि अमावस्या के चार चाँद है।
चार साल का कार्यकाल पूरा होने पर प्रदेश के मुख्यमंत्री पिछली सरकार के विकास कार्यों को अपने खाते में गिनाने और ठप पड़े विकास की लीपापोती करने के लिए धर्मशाला आ रहे हैं।
वॉर म्यूज़ियम का पिछली सरकार में ही उद्घाटन हो चुका था जिसे इस सरकार ने चार वर्ष ताला लगाकर रखा और अब उसी भवन का फिर उद्घाटन करवाने का कार्यक्रम है। यह न केवल धर्मशाला की जनता बल्कि हमारे वीर सैनिकों के साथ भी एक भद्दा मजाक है।
उन्होंने कहा कि क्या यह सत्य नहीं है कि केंद्रीय विश्वविद्यालय के अब धर्मशाला कैंपस को केवल मात्र इसलिए छोटा कर दिया गया है क्योंकि सरकार के पास NPV जमा करवाने के लिए धनराशि उपलब्ध नहीं है। दोबारा से नाप नपाई करके कांग्रेस सरकार के समय में प्रस्तावित भूमि से अब केवल मात्र 25 प्रतिशत हिस्सा ही नए प्रारूप में रखा गया है।
धौलाधार होटल का विस्तार और सौंदर्यीकरण एशियन डेवलपमेंट बैंक से आए पैसों द्वारा हुआ है जोकि पूर्व की कांग्रेस सरकार के दौरान धर्मशाला चुनाव क्षेत्र के लिए स्वीकृत हुए थे।
जहां तक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र का सवाल है जोरावर स्टेडीयम में पहले ही फूटबाल अकादमी प्रस्तावित है जिस के लिए पूर्व सरकार के समय का पैसा आया हुआ है। उसके ठीक सामने इंडोर जिमनेसियम तथा झील प्रस्तावित है, जिसका पिछली सरकार के समय में शिलान्यास किया गया था।
स्टेडीयम खेलों के लिए है ना की कंक्रीट के जंगल खड़े करने के लिए इस से छेड़छाड का पुरजोर विरोध होगा।धर्मशाला रोपवे पूर्व कांग्रेस सरकार की देन है यह रोपवे 140 करोड़ रुपय में टाटा कंपनी को दिया गया था। इसे आज से लगभग साड़े तीन वर्ष पहले चालु होना था। क्या कारण रहे की इसकी लागत 140 करोड़ से बड़कर 200 करोड़ को पार कर गयी।
जहां से रोपवे शुरू होना है वहां पार्किंग का काम अभी तक शुरू क्यूँ नहीं हुआ। क्या यह सच नहीं है की सरकार के ढुलमुल रवैए के चलते टाटा ने अपने इस प्रोजेक्ट के शेयर दूसरी कंपनियों को भी बेच दिए हैं। प्रोजेक्ट में देरी होने के कारण जो सरकारी खजाने को चपत लगी है उस की ज़िम्मेवार वर्तमान सरकार है।
अगर सरकार इतनी ही प्रगतिशील होती तो शिमला और हिमानी चामुंडा रोपवे का काम शुरू करवाती। जितने भी प्राजेक्ट्स का उदघाटन आनन फ़ानन में होने जा रहा है सब कार्य पूर्व कांग्रेस सरकार के समय के हैं। चार वर्ष में एक नया काम (कोयल पंथी) सरकार नहीं कर पाई है।
सुधीर शर्मा ने मुख्यमंत्री से पूछे सवाल
1. दूसरी राजधानी का क्या हुआ ?
2. दाडी में बनने वाले स्वतंत्रता सेनानी भवन का काम अभी तक शुरू क्यूँ नहीं हुआ ?
3. योल कैंटोन्मेंट के लिए सरकार ने क्या किया ?
4. गग्गल हवाई अड्डे के विस्तार में विलंभ क्यूँ ?
5. आइ टी पार्क चैतडु के लिय प्रस्तावित धनराशि कहाँ है ?
6. केंद्रीय विश्विध्यालय के लिय जब भूमि चिन्हित थी तो दोबारा से लीपा पोती क्यों ?
7. इंडोर स्टेडीयम के साथ बन ने वाले SAI के हॉस्टल का क्या हुआ ?
8. नरघोटा में HIMUDA द्वारा ली गयी भूमि पर बनने वाली न्यू टाउनशिप का क्या हुआ ?
9. हिमानी चामुंडा रोपवे का क्या हुआ ?
10. धर्मशाला स्मार्ट सिटी में हो रहे कार्यों की गुणवत्ता की जांच क्यूँ नहीं ?







