धर्मशाला: भाजपा सरकार प्रदेश की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं के साथ खिलवाड़ कर रही है। यह बात पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा ने कही। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि सरकार के ढुल मुल रवैये के कारण आज प्रदेश में कोई नया निवेश नहीं आया है। नई योजनाओं और परियोजनाओं की तो बात दूर है लेकिन पूर्व कांग्रेस सरकार के समय की परियोजनाओं पर भी कोई काम नहीं हो रहा है।
सुधीर शर्मा ने कहा कि ये दुख की बात है की श्री चामुण्डा से हिमानी चामुंडा के लिए बनने वाले रोपवे प्रोजेक्ट को टर्मिनेट कर दिया गया है। हिमानी चामुण्डा रोपवे का काम सन 2015 में दिल्ली की उषा ब्रेको कंपनी को PPP मॉड में अवार्ड किया गया जिसकी लागत 400 करोड़ रुपया आनी थी और लंबाई लगभग 6 किलोमीटर की प्रस्तावित थी।
जिसमें चामुंडा और हिमानी चामुण्डा के बीच में एक जगह पर्यटकों के लिए सुविधा केंद्र को भी विकसित किया जाना था, ये प्रोजेक्ट 2019 तक पूरा करने का प्रस्ताव था।
सुधीर शर्मा ने कहा की वह सरकार से जानना चाहते हैं की इस प्रोजेक्ट का वर्तमान स्थिति क्या है ? इस रोपवे प्रोजेक्ट को काम में देरी के कारण क्या है? इस रोपवे प्रोजेक्ट को शुरू न हो पाने और सरकारी औपचारिकताएं पूरी न हो पाने के लिए ज़िम्मेवार कौन है ?
इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में ढिलाई बरतने और देरी के कारण बनने वाले व्यक्तियों पर क्या कोई कार्रवाई हुई है।
वर्तमान सरकार ने इस प्रोजेक्ट को शुरू करने व तेज गति देने के लिए क्या प्रयास किए।
सुधीर शर्मा ने कहा कि ये रूप में प्रोजेक्ट फरवरी 2022 को निरस्त कर दिया गया है जिसके मुख्य कारण भूमिका उपलब्ध न होना देश के लिए की छह वर्ष का समय लग गया है। इस प्रोजेक्ट से सरकार को सालाना साढ़े सात सौ करोड़ रुपये की आमदनी होनी थी और कई लोगों को रोजगार के साधन उपलब्ध होने थे, लेकिन ये दुख की बात है की जहां सारा निवेश कंपनी द्वारा किया जाना था वहां भी सरकार के ढुल मुल रवैये के कारण आज यह प्रोजेक्ट निरस्त हो गया है।
श्री चामुण्डा धाम और हिमानी चामुंडा रोपवे से सरकार को सालाना 750 करोड़ रुपये की आमदनी का करार इस प्रोजेक्ट को आवंटित करते समय किया गया था जिस पर अब पूर्णविराम लग चुका है। न केवल ये प्रोजेक्ट किन्तु शिमला रोपवे में प्रोजेक्ट जिसे की शिमला बाईपास से जोधा निवास तक जाना था और वो प्रोजेक्ट 2015 में उषा ब्रेको कंपनी को आवंटित किया गया था सन 2022 के जनवरी में निरस्त कर दिया गया है।
शिमला रोपवे में प्रोजेक्ट को साढ़े तीन साल में पूरा करना था जिसकी 250 करोड़ रूपये की लागत आनी थी और जिसे 6 वर्ष में पूरा करना था। लेकिन प्रदेश की राजधानी के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को जिससे की सालाना 10 करोड़ रुपये की आमदन शिमला नगर निगम को होनी थी वह आज निरस्त कर दिया गया है।
सुधीर शर्मा ने कहा इन दोनों महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का निरस्त होना दुर्भाग्यपूर्ण है। आज सरकार बड़ी परियोजनाओं की बात कर रही है और नए नए रोपवे बनाने के लिए अपना सीना ठोक रही है, लेकिन इन दोनो रोपवे प्रोजेक्ट का कार्य निरस्त होना सरकार की कार्यप्रणाली और सरकार की इन महत्वाकांक्षी प्रोजेक्टों की तरफ़ सोच को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश के विकास में पूरी तरह विफल रही है यही कारण है की छोटे छोटे विकास कार्य भी प्रदेश में ठप पड़े हैं।







