स्पेशल डेस्क, नई दिल्ली : राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को लेकर शिक्षा मंत्रालय ने एक कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया है। इसके उद्घाटन सत्र में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल है। दोनों ने इस कॉन्फ्रेंस का शीर्षक ‘उच्च शिक्षा में बदलाव के मद्देनजर राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भूमिका’ तय किया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति गवर्नर्स कॉन्फ्रेंस में सभी राज्यों के शिक्षा मंत्री, राज्यों के विश्वविद्यालयों के कुलपति और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी सम्मिलित हैं।
राष्ट्रपति ने कहा की नई शिक्षा नीति में इस बात पर बल दिया गया है कि हम सबको भारतीय जीवन-मूल्यों पर आधारित आधुनिक शिक्षा प्रणाली विकसित करनी है। साथ ही यह भी प्रयास करना है कि सभी को उच्च गुणवत्ता से युक्त शिक्षा प्राप्त हो तथा एक जीवंत व समता-मूलक नॉलेज सोसाइटी का निर्माण हो। उन्होंने कहा की 1968 की शिक्षा नीति से लेकर इस शिक्षा नीति तक, एक स्वर से निरंतर यह स्पष्ट किया गया है कि केंद्र व राज्य सरकारों को मिलकर सार्वजनिक शिक्षा के क्षेत्र में GDP के 6% निवेश का लक्ष्य रखना चाहिए। 2020 की शिक्षा नीति में इस लक्ष्य तक शीघ्रता से पहुंचने की अनुशंसा की गई है।
प्रधानमंत्री ने कहा की राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भविष्य को ध्यान में रखते हुए व्यापक प्रावधान किए गए है। जैसे-जैसे तकनीक का विस्तार गांवों तक हो रहा है। वैसे-वैसे सूचना और शिक्षा का एक्सेस भी बढ़ रहा है। हमारी जिम्मेदारी है कि हम हर कॉलेज में तकनीकी सॉल्यूशंस को ज्यादा प्रमोट करें। लंबे समय से ये बातें उठती रही हैं कि हमारे बच्चे बैग और बोर्ड एग्ज़ाम के बोझ तले, परिवार और समाज के दबाव तले दबे जा रहे हैं। इस पॉलिसी में इस समस्या को प्रभावी तरीके से एड्रेस किया गया है। नई शिक्षा नीति, पढ़ने के बजाय सीखने पर फोकस करती है और पाठ्यक्रम से और आगे बढ़कर गहन सोच पर ज़ोर देती है। इस पॉलिसी में प्रक्रिया से ज्यादा जुनून, व्यावहारिकता और प्रदर्शन पर बल दिया गया है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 पर चर्चा के लिए देशभर में वेबिनार, वर्चुअल कॉन्फ्रेंस और सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं। शिक्षा मंत्रालय और विश्वविद्यालय अनुदान आयोगने इससे पहले राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत उच्च शिक्षा में परिवर्तनकारी सुधारों पर सम्मेलन’ आयोजित किया था, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने संबोधित किया था।







